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बुध के जन्म की कथा ,, बलात्कारी चंद्रमा

     बुध के जन्म की कथा            

बुध की जन्म कथा
नमस्कार दोस्तों

                      पौराणिक कथाएं हमारे जीवन को बहुत प्रभावित करती हैं।क्योंकि इनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं. वैसे है आज कि कथा हैं। जिसका वर्णन विष्णुपुराण के चतुर्थ अंश के छठें अध्याय में उल्लेखित हैं। जो कुछ इस प्रकार हैं।


               दोस्तों ब्रम्हा के पुत्र अत्रि प्रजापति थे. और अत्रि प्रजापति के पुत्र हुए चन्द्रमा। तब ब्रम्हाजी ने चन्द्रमा को औषधि द्विजजन और नक्षत्रगण का अधिपति घोषित किया। चन्द्रमा ने राजसुयज्ञ का अनुष्ठान किया। जिससे चन्द्रमा को अपने प्रभाव और अधिपति होने का राजमद सवार हो गया। और घमंड में मदोन्मत हो जाने के कारण उसने समस्त देवताओं के गुरु वृहस्पति कि पत्नी तारा का अपहरण कर लिया।
               
             तब वृहस्पति जी ब्रम्हा जी कि शरण में गये अतः ब्रम्हा और देवतागण चन्द्रमा के पास गये। और वृहस्पति कि पत्नी तारा को चन्द्रमा से वापस करने कि बात कही। लेकिन ब्रम्हा जी और देवर्षियों के बहुत कहने पर भी चन्द्रमा ने तारा को वापस नहीं किया। तो स्थिति युद्ध कि बन गई। वहीँ शुक्र जी चन्द्रमा कि तरफ चले गये क्योंकि वे वृहस्पति से ईर्ष्या करते थे।

            तथा अंगिरा से शिक्षा प्राप्त करने वाले भगवान रूद्र ने वृहस्पति कि सहायता की क्योंकि वृहस्पति जी अंगिरा के पुत्र थे। अब चन्द्रमा की तरफ से शुक्र जी और जम्भ कुम्भ आदि दैत्य सहित सहायता के लिए उपस्थित हुए। और वृहस्पति जी की तरफ से भगवान रूद्र समेत समस्त देव सेना और इंद्र जी उपस्थित हुए. इस प्रकार तारा के लिए भयंकर युद्ध छिड़ गया।

        तथा रूद्र आदि देवगन दानवों के लिए और दानव देवतागण के लिए भयंकर अस्त्र शस्त्र छोड़ने लगे।इस तरह समस्त संसार भयंकर देव असुर संग्राम से त्रस्त होकर ब्रम्हा जी के शरण में गया। तब ब्रम्हा जी ने युद्ध रोकवा कर चन्द्रमा को समझाया और वृहस्पति की पत्नी तारा को वापस दिलवाया। लेकिन वृहस्पति के सामने एक और समस्या आ गई।

         क्योंकि वह गर्भवती थीं।  उसके गर्भ को देखकर वृहस्पति ने कहा कि  मेरे क्षेत्र में किसी और का गर्भ धारण करना ठीक नहीं हैं अतः ऐसे दूर करो मेरी नजरों से। वृहस्पति के ऐसा कहने पर उस पतिव्रता ने पति के खेल अनुसार वह गर्भ इष्टिकास्तम्भ मतलब सींक कि झाड़ी में छोड़ दिया. उस छोड़े हुए ने अपने तेज़ से समस्त देवताओं के तेज़ को मालिनी कर दिया

        तदन्तर उस बालक कि सुंदरता के कारण चन्द्रमा और वृहस्पति दोनों को उत्सुक देखा देवताओं ने संदेह हो जाने के कारण तारा से पूछा कि "हे सुभागे तुम हमें सच सच बताओ यह पुत्र चन्द्रमा के हैं या वृहस्पति का। देवताओं के ऐसा कहने पर तारा ने लज्जावश कुछ भी नहीं कहा। ज़ब बहुत पूछने पर भी तारा ने कुछ नहीं बताया।

        तो वह बालक स्यंम श्राप देने के लिए उद्घृत होकर बोला कि अरे दुष्ट माता मेरे पिता का नाम तू क्यों नहीं बताती अभी मैं तेरी ऐसी गति करूँगा कि तू धीरे बोलना भूल जाएगी। तब ब्रम्हाजी ने बालक को रोक कर तारा से पूछा कि बेटियों सच सच बता यह पुत्र किसका हैं वृहस्पति का या चन्द्रमा का।

      ब्रम्हा जी के इस तरह पूछे जाने पर तारा ने लज्जापूर्वक कहा कि यह पुत्र चन्द्रम का हैं। यह सुनकर चन्द्रमा खुश हो गये। और बालक को ह्रदय से लगाकर बोले कि पुत्र तुम तो बहुत बुद्धिमान हो. और उस बालक का नाम बुध  रखा।
         तो दोस्तों बुध के जन्म कि कथा कैसी लगी कमेंट के माध्यम से अवश्य बताये अगर कोई सुझाव हैं तो भी कमेंट करें.    ✓धन्यवाद ✓

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