Breaking News

भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ।

       गणेश का जन्म कैसे हुआ।                     भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ

नमस्कार दोस्तों

                गणेश जी के जन्म कि कथा तो लगभग सभी जानते हैं । लेकिन जो कथा मैं आज लेकर आया हूँ वो बिलकुल अलग हैं । जिसका वर्णन लिंग पुराण के हिन्दी pdf के पृष्ट संख्या 307 पर उल्लेखित हैं आइये जानते हैं। इस कथा के बारे........


         एक बार सभी देवता ब्रम्हा विष्णु समेत भगवान शिव के पास गये। और भगवान शिव को प्रणाम किया। तब शिवजी ने कहा कि "हे देवताओं तुम्हारा कल्याण हो बताइये आप सभी किस प्रयोजन हेतु हमारे पास पधारे हैं। तब सभी देवताओं बोले कि हे भोलेनाथ आप तो सर्वव्यापी हैं आपसे तो कुछ नहीं छिपा है।

          आप तो जानते हैं दैत्यों ने हमारा जीवन दुर्लभ कर रखा हैं।  कोई भी यज्ञ हवन धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं होने देते, हमेशा हमेशा हम देवों का अपमान करने वाले दैत्यों से कभी कोई बिघ्न न हो यही वरदान चाहते हैं।अतः हे देवाधि देव महादेव आप इसका कुछ निवारण करें। यह सुनकर पिनाकी शिव ने तथास्तु बोला और गणेश्वर का शरीर धारण किया।

        सभी देवी देवताओं और गणों ने संसार का दुःख दूर करने वाले गजानन,  गज मतलब हाथी के सामान मुख वाले त्रिशूल धारण करने वाले गजानन को देखा। उस समय सिद्ध मुनीश्वर देवी देवताओं ने आकाश मार्ग से फूलों कि वर्षा करने लगे । तथा गणेश और महेश को प्रणाम किया,  फिर मूर्तमान सुन्दर बालक गजमुख गणेश ने महेश्वर और अंबिका को प्रणाम किया।

        तथा भगवान शिव ने बालक के सिर पर हाथ फेरा माथे पर चुम्बन किया और कहा की "हे पुत्र तेरा अवतार दैत्यों के नाश और संतों  के उपकार के लिए हुआ हैं।
    अध्यापन, अध्ययन, व्याख्यान, रूपी कर्मो को जो अन्याय पूर्वक करता हैं। उसके प्राणो का हारने कर। दक्षिणहीन जो यज्ञ करें उसके यज्ञो में तू विध्न  डाल। जो स्त्री अथवा पुरुष अपने वर्ण से गिरा हैं और अपने धर्म का पालन नहीं करता उसके प्राणो का हरण  कर।  हे विनायक जो स्त्री या पुरुष नित्य तेरी पूजा करते हैं उन्हें संपत्ति प्रदान कर भक्तों की सदैंव रक्षा कर।

     तीनो लोकों में तू सर्वपूज्य और वंदनीय होगा,  जो मुझको ब्रम्हा को और विष्णु  को यज्ञादिकों में पूजेँगे,  उनमे सबसे पहले तुम्हारा पूजन होगा,  जो तुम्हारा पूजन करके धार्मिक कार्य करेगा उसका कल्याण और जो तेरा पूजन नहीं करेगा उसका अकल्याण होगा,  ब्राम्हण, क्षत्रिय,  वैश्य, और शूद्र सर्वसिद्धि के लिए अनेक प्रकार के भोजन का भोग लगाकर पूजन करेंगे उन्हें यथार्थ फल प्राप्त होगा।

     वहीँ गन्ध,पुष्प, धूप आदि से न पूजन करने वाले को,  चाहे वह मनुष्य हो या देव कोई फल प्राप्त नहीं होगा. ब्रम्हा विष्णु और महेश तथा अन्य देवताओं का पूजन करने वाला पुरुष प्रथम तुम्हारा पूजन करके विघ्न बाधाओं से रहित रहेगा। तब से गणेश जी का सभी पूजन करते हैं क्योंकि वे दैत्यों के हवन का ध्वंस करने वाले हैं. इस प्रकार स्कंद  के भाई गणेश की उत्पत्ति हुई.

दूसरी कथा

 दूसरी कथा के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे की कैसे माता पार्वती ने अपनी सखियों के कहने पर अपने मैल से गणेश जी बनाया और उसमे प्राण डालें। फिर अपने भवन के बाहर पहरेदारी का कार्य सौंपा। तथा भगवान शंकर को भवन के अंदर जाने से रोकने पर भगवान शंकर ने क्रोध वश गणेश का सिर काट डाला । तथा बाद में ज़ब माता पार्वती ने बताया की यह हमारा ही पुत्र हैं तो भगवान शिव ने हाथी का सिर फिर से गणेश जी के धड़ से जोड़ा था।
   
              दोस्तों आपको पहली कथा सच्ची लगती हैं या दूसरी कथा हमें कमेंट में जरूर बताएं    ✓धन्यवाद ✓

कोई टिप्पणी नहीं