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शिवजी को वश में कैसे करे ,

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नमस्कार दोस्तो 
           मै राहुल एक बार फिर से आप सभी का स्वागत करता हूं । सुनने में कितना अजीब लगता है कि जो कालों के काल महाकाल है जो देवों के देव महादेव है । उनको भला कोई कैसे वश में के सकता । लेकिन अगर लिंग पुराण की माने तो उसमे जो उल्लेख मिलता है । जिसमे स्यंम भगवान शिव जी ने माता पार्वती के पूछने पर बताया है कि कैसे कोई मुझे वश में के सकता है । जिसका उल्लेख लिंग पुराण हिंदी pdf के पृष्ठ संख्या 67 और 68 पर किया गया है । 

       एक बार भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर बैठकर आपस में संवाद(बातचीत) कर रहे होते है । तभी माता पार्वती भगवान शिवजी से कहती है कि "हे महादेव आप किस उपाय या किस पूजा द्वारा वश में हो जाते है । किस विद्या के द्वारा ,किस तपस्या के द्वारा, अथवा किस योग के  आपको वश में किया जा सकता है कृपया करके मुझे बताने का कष्ट करें । 

      इस प्रकार भगवती की उत्सुकता को देखकर भगवान शंकर जी ने पार्वती जी की अोर देखा फिर बाल चंद्रमा के तिलक को धारण करने वाले शिव पूर्ण चंद्रमा के समान सुन्दर मुख वाली पार्वती जी से हंसते हुए बोले की "हे देवी इस सुंदर पुरी को प्राप्त कर आपने सुंदर अति प्रश्न पूछा है । हे भगवती इस प्रकार का प्रश्न बहुत पहले हिमालय की पत्नी मैना ने पूछा था । उसका मुझे स्मरण हो रहा है , हे देवी जो तुमने आज पूछा है । वह पूर्वकाल में पितामह ब्रम्हा जी ने भी पूछा था । 

       हे कल्याणी ब्रम्हा जी ने मुझे श्वेत नमक कल्प में श्वेत वर्ण में देखा तथा सद्योजात नमक अवतार में देखा, रक्त कल्प में मुझे लाल रंग में देखा, इसान कल्प में विश्वरुपाख्य को देखा, इस प्रकार से मुझ विश्व रूप शिव को देखकर ब्रम्हा जी बोले की "हे तत्पुरुष, हे अघोर देवाधिदेव महादेव जी आप मुझे गायत्री के साथ दिखे है । 

        अतः हे महादेव आप किस प्रकार वश मे हो जाते है, औऱ किस प्रकार आपका ध्यान करना चाहिए, अथवा आप कहा ध्यान किये जाते,  आप कहाँ देखे जाते है, तथा आप कहाँ पूजे जाते है, आप मुझे कृप्या पूर्वक बताइये, क्योंकि यह रहस्य आप ही बताने मे समर्थ है,  

    तब भगवान शिव जी बोले की "हे कमल से पैदा होने वाले ब्रम्हा जी,  मैं तो केवल श्रद्धा से ही वश मे होता हूँ, मैं लिंग मे ध्यान करने योग्य हूँ, तथा क्षीरसागर मे श्री विष्णु द्वारा देखा गया हूँ, औऱ मेरे पंचरूप के द्वारा मैं पूज्य हूँ, श्रद्धा से ही मेरा पूजन करना चाहिए, क्योंकि श्रद्धा मे ही परमधर्म है, श्रद्धा ही शुक्ष्मज्ञान, तप, हवन है, श्रद्धा ही स्वर्ग, मोक्ष आदि है, औऱ श्रद्धा से ही मैं सदा दर्शन देता हूँ । 

     यह उपाय बताकर भगवान शिव जी ध्यानमग्न हो गये,  औऱ माता पार्वती की जिज्ञासा भी शान्त हो गई। 

महाकाल के बारे मे कहा गया है की :- 
                   अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का । 
              काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का ।।

                 महाकाल नाम की चाबी ऐसी जो हर ताले को खोले ।
             काम बनेंगें उसके सारे जो " जय श्री महाकाल"जी बोले ॥ 
                                         जय महाकाल  
तो दोस्तों आपको जानकारी कैसी लगीं कमेंट मे जरूर  बताएं  :-  धन्यवाद 


१ :- ब्रम्हा जी मृत्यु क्यो हुई , पौराणिक कथा
२ :- शिव जी ने स्तनपान किया था इस देवी का , पौराणिक कथा

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