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विष्णु जी ने अपने दो बाल क्यो उखाड़े,

                     विष्णु जी ने अपने दो बाल क्यो उखाड़े

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नमस्कार दोस्तों
                आज मैं जो कथा लेकर आया हूँ इसका वर्णन विष्णुपुराण के 5वें अंश के प्रथम अध्याय मे किया गया है, कथानुसार ....?

         एक बार पृथ्वी अपने ऊपर अत्यंत भार से पीड़ित होकर,  गाय का रूप बनाकर सुमेरु पर्वत पर देवी और देवताओं के पास गई, औऱ परमपिता ब्रम्हा जी को प्रणाम करके बोली की " हे पितामह जिस प्रकार सूर्य स्वर्ण का औऱ किरणों के समूह का परमगुरु है, उसी प्रकार समस्त लोकों के गुरु मेरे गुरु है, हे देवगन आप लोंगो का समूह भी उन्ही का अंश स्वरुप है।

       आदित्य, रूद्र, वसु, अग्नि, राक्षस, दैत्य, दानव, गन्धर्व, सर्प , अप्सरा, ग्रह, नक्षत्र, समस्त जगत ही विष्णुमय है, हे दिव्यमूर्तिधरी देवगण इस समय मेरे ऊपर महाबलवान औऱ गर्बीले दैत्यराजो की अनेक अक्षौहिणी सेनाएं है, मैं आपको यह बता देती हूँ, की अब मैं अत्यंत भार से पीड़ित होकर अपने आप को धारण करने मे असमर्थ हूँ, अतः हे महाभागगण मेरा भार उतारने का कोई उपाय कीजिये, कहीं मैं अत्यंत व्याकुल होकर रसातल (पाताललोक) मे न चली जाऊ।

      यह सुनकर ब्रम्हाजी भी परेशान हो गये औऱ पृथ्वी का भार कम करने के लिए उपाय सोचने, लेकिन बहुत सोचने पर भी ज़ब कोई उपाय नहीं सूझा, तो पृथ्वी से बोले की " हे पृथ्वी तुम तनिक भी व्याकुल मत हो, इसका निवारण श्री विष्णु के पास अवश्य होगा अतः मेरे साथ तुम भी नारायण की स्तुति करो, तब ब्रम्हा जी सहित समस्त देवताओं ने नारायण की स्तुति करने लगे।

      तमाम प्रकार की स्तुति सुनकर भगवान नारायण ने अपना विश्वरूप प्रकट करते हुए ब्रम्हा जी से बोले की " हे ब्रम्हा जी देवताओं सहित आपको जिस भी वस्तु की इच्छा है वह सब कहो औऱ उसे सिद्ध हुआ ही समझो, तब ब्रम्हा जी बोले कि  " हे भगवन इस पृथ्वी पर उत्पन्न महान असुरो के उत्पात से यह पृथ्वी शिथिल हो गई है, यह संसार का भार उतारने के लिए आपके शरण मे आयी हुई है, अतः हे भगवन मैं औऱ समस्त देवगण यहाँ उपस्थित औऱ आप से निवेदन करते है कि इस पृथ्वी का कष्ट दूर करें औऱ हमारे लिए क्या आज्ञा है वह भी बताएं, क्योंकि आपकी ही आज्ञा का पालन करते हुए हम समस्त दोषों से मुक्त हो पाएंगे,,

        ब्रम्हा जी के इस प्रकार कहने पर भगवान नारायण ने अपने श्वेत औऱ श्याम रंग के दो केश उखाड़े औऱ देवताओं से बोले कि " मेरे ये दोनों केश (बाल) पृथ्वी पर अवतार लेकर पृथ्वी को भार रूपी कष्ट से मुक्ति दिलाएंगे, अतः सब देवता अपने अपने अपने अंश से अवतार लेकर समस्त दैत्यों से युद्ध करेंगे, तब निसंदेह पृथ्वी तल पर संपूर्ण दैत्य गण मेरे दृष्टिपात से दलित ( विनाश) होकर पतित (नष्ट) हो जायेंगे, वासुदेव कि जो भार्या (पत्नी) है उनकी 8वें गर्भ मे से यह श्याम वर्ण का केश अवतार लेगा, जो श्याम (कृष्णा) के नाम से जाना जायेगा,  और कालनेमी के अवतार कंश का वध करेगा,  ऐसा कहकर श्री हरी विष्णु अदृश्य हो गये।

        औऱ समस्त देवगण सुमेरु पर्वत पर वापस लौट आये, पृथ्वी भी निश्चिन्त होकर अपने स्थान को चली गई, वहीँ श्याम केश भगवान कृष्णा के रूप मे पृथ्वी पर अवतार लेकर कंश जैसे तमाम दैत्यों के विनाश का कारण बने, और आपको याद होगा महाभारत के तमाम योद्धा देवता के अवतार थे, तथा सभी ने दैत्यों से युद्ध करके उनका विनाश भी किया था,  औऱ वहीँ श्वेत केश पृथ्वी पर राधा के रूप मे अवतीर्ण हुआ था।

 दोस्तों भगवान कृष्णा कि 16108 पत्नियाँ मानी जाती है लेकिन विष्णुपुराण के अनुसार भगवान कृष्णा कि 16001 रानी तथा 88000 पुत्र थे।

             दोस्तों अगर आपको यह कथा अच्छी लगी है तो इसे अपने दोस्तों मे भी शेयर करें,  साथ ही कमेंट मे जय श्री कृष्णा लिखना न भूलें।      
                                           👉धन्यवाद👈

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