Breaking News

पांखण्डी ब्राम्हण से बात करने की सजा, पौराणिक कथा



                                  पौराणिक कथा           

                    
नमस्कार दोस्तों

                  आज की करहा का वर्णन विष्णुपुराण के तृतीय अंश के 18 वें अध्याय मे किया गया है, जिसमे बताया गया है कि कैसे एक राजा को पाखंडी ब्राम्हण से बात करने कि सजा मिली, कथानुसार....

 काल मे शतधनु नामक राजा हुए, औऱ उनकी पत्नी हुई शैव्या, जो अत्यंत पतिव्रता, उच्चगुण औऱ उच्च विचार वाली थीं, वें प्रतिदिन पूजा पाठ दान पुण्य औऱ धार्मिक कार्य किया करते थे, एक दिन कार्तिकी पूर्णिमा को उपवास कर गंगा स्नान करके वापस आ रहें थे, तभी उन्हें एक पाखंडी ब्राम्हण आता दिखा जो कि महात्मा राजा के धनुर्वेदाचार्य का परममित्र था,
     अतः मित्र का मित्र होने के नाते राजा उस पाखंडी ब्राम्हण से कुशल मंगल पूंछने लगे, लेकिन राजा कि पत्नी मौन ही रही, फिर उन राजा रानी ने आकर यथारीति भगवान विष्णु कि पूजा पूरे विधिविधान से की, उसके कुछ वर्ष पश्चात् राजा शतधनु की मृत्यु हो गई, औऱ रानी ने सतीप्रथा का पालन करते हुए आत्मदाह कर लिया,

       राजा शतधनु ने उपवास की अवस्था मे पाखंडी ब्राम्हण से बात चीत की थीं, इसलिए उस पाप के कारण उसका जन्म कुत्ते की योनि मे हुआ, औऱ रानी काशीनरेश की पुत्री हुई, जो सर्वलक्षण संपन्न औऱ जातिस्मरा मतलब पूर्वजन्म को जानने वाली थीं, ज़ब वह वयस्क हुई तो राजा ने उसके विवाह की इच्छा जाहिर की, लेकिन ज़ब उस सुंदरी ने विवाह करने से मना कर दिया तो राजा ने उसके विवाह की इच्छा त्याग दी,
        एक दिन उस कन्या ने दिव्यदृष्टि से अपने पूर्वजन्म के पति को कुत्ते के रूप मे विदिशा नगरी मे देखा, तब उस महाभाग ने विदिशा जाकर कुत्ते को सत्कार पूर्वक भोजन कराया, और इच्छित भोजन पाकर, वह कुत्ता भी उस कन्या को चाटने लगा, तब उस कन्या ने कुत्सित योनि मे उत्पन्न अपने प्रियतम को प्रणाम करके बोली की " हे नाथ आप अपनी उस उदारता का स्मरण कीजिये, जिसके कारण आप कुत्ते की योनि मे जन्म लेकर मेरे चाटुकार बने हो, क्या आपको वह स्मरण नहीं है, कि तीर्थस्नान के बाद उस पाखंडी ब्राम्हण से वार्तालाप करने के कारण ही आपको यह कुत्ते कि योनि मिली है,
       इस प्रकार स्मरण कराये जाने पर, उस कुत्ते ने बहुत देर तक अपने पूर्वजन्म का स्मरण किया, औऱ ज़ब याद आया, तो उदास मन से नगर के बाहर गया औऱ अपने प्राण त्याग दिए, इसके बाद वह सियार कि योनि मे जन्मा, वहाँ भी अपने पति को सियार योनि मे जन्मा देख, वह बालिका उससे मिलने कोलाहल पर्वत गई, औऱ बोली कि "हे महाराज कुत्ता योनि मे जन्म लेने पर मैंने जो आपसे पाखंडी ब्राम्हण से वार्तालाप विषयक पूर्वजन्म का वृतांत कहा था क्या वह आपको स्मरण है" तब सियाररूपी सत्यनिष्ठ शतधनु ने कन्या के इस प्रकार कहने पर सारा वृतांत जानकर निराहार रहकर जंगल मे अपने प्राण त्याग दिए, फिर वह भेड़िया बनकर जन्मा,
           उस समय भी राजा कन्या ने वन मे जाकर अपने पति को उसके पूर्वजन्म का वृतांत स्मरण कराया, औऱ बोलो कि "हे राजेंद्र तुम भेड़िया नहीं अपितु राजा शतधनु हो, तुम क्रमशः कुत्ता, सियार औऱ अब भेड़िया योनि मे जन्मे हो, इस प्रकार राजा को स्मरण कराने पर राजा ने भेड़िया का भी शरीर छोड़ दिया, औऱ वह गधा बनके जन्मा, औऱ फिर उस कन्या ने जाकर उसे पूर्वजन्म को दिलाया औऱ बोली कि "हे राजन तुम अपने स्वरूप को याद करो, इस गधा चेष्टाओं को छोड़ दो, पाखंडी से बात करने के दोष से ही तुम गधा योनि मे उत्पन्न हुए हो,

       अतः वह अगले जन्म मे कौव्वा के रूप मे उत्पन्न हुआ, तब पति को योगबल से पाकर वह सुंदरी उससे कहने लगीं, कि "हे प्रभु जिसके वशीभूत होकर संपूर्ण सामंतगण अनेक प्रकार कि वस्तुएं भेंट करते थे वहीँ आप आज काकयोनि को प्राप्त कर बलिभोजी हुए हो, पूर्वजन्म को याद करके राजा ने फिर अपने प्राण त्याग दिए, औऱ मयूर योनि मे जन्मे, मयुरवस्था मे भी कशी नरेश कन्या ने उसे छड़ छड़ मे अतिप्रिय आहार देती रही,
           औऱ उसकी देखरेख करती रही, उसी समय राजा जनक ने अश्वमेघ यज्ञ किया उस यज्ञ मे अवमृघ स्नान के समय उस मयूर को भी स्नान कराया, और कन्या ने स्नान करके, मयूररूपी राजा को स्मरण कराया कि किस प्रकार वह कुत्ता, कौव्वा, सियार, भेड़िया, आदि योनि को ग्रहण किया, अपने पूर्वजन्म को जानकर तथा जन्मपरम्परा स्मरण कर मयूर ने भी अपने प्राण त्याग दिए, औऱ फिर महात्मा जनक के यहाँ ही पुत्र रूप मे जन्म लिया, तब उस कन्या ने अपने विवाह के लिए अपने पिता को प्रेरित किया, तथा स्वयंबर मे फिर से अपने पति का वरण करके फिर से पतिरूप मे प्राप्त किया, औऱ सुखपूर्वक रहने लगे,
                             तो दोस्तों आपको कथा कैसी लगीं कमेंट मे जरूर बताएं, धन्यवाद

REED MORE STORIES :-
१:- शिवजी को वश में कैसे करें
२:- ब्रम्हा जी की मृत्यु क्यों हुई
३:- मोहमाया का जन्म कैसे हुआ
३:- जब पुरुष ने बच्चा पैदा किया

कोई टिप्पणी नहीं