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इंद्र और महर्षि च्यवन में सोमरस के लिए युद्ध क्यों

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नमस्कार दोस्तों,
           देवराज इंद्र और महर्षि च्यवन के बीच सोमरस के लिए युद्ध क्यों हुआ था, इस घटना का संपूर्ण वर्णन महाभारत के वनपर्व में किया गया है,

कथानुसार :-
             महर्षि भृगु के पुत्र थे च्यवन ऋषि, एक बार इन्होंने तपस्या करने की ठानी और एक सरोवर(तालाब) के किनारे वीरासन करके बैठ गए, धीरे -2 उन्हें बहुत समय बीत गया उन्हें बिना हिले डुले बैठे हुए , इसलिए उनके ऊपर चीटियों ने अपना अड्डा बना लिया, और वें चारो तरफ से मिट्टी के ढेर से ढँक गए, जिस कारण वह एक मिट्टी के पिंड सा दिखाई देने लगा, इस प्रकार बहुत समय बीत गया,

          और एक दिन उस सरोवर के किनारे राजा शर्याति अपनी चार रानियों और पुत्री सुकन्या के साथ क्रीड़ा करने के लिए आये, और वह कन्या अपनी सहेलियों के साथ महर्षि च्यवन के बॉंबी के पास पहुच गयी, उसने उस बॉंबी के अंदर ऋषि की चमकती हुई आंख देखी और जिज्ञासा वश एक कांटा उठाया और उसमे छेद कर दिया, इस प्रकार अंख फूट जाने के कारण ऋषि बहुत क्रोधित हुए, और ऋषि च्यवन ने राजा की सेना सहित सबके मल मूत्र ही बंद कर दिए,

        जिससे राजा सहित सभी को बड़ा कष्ट हुआ, तब राजा ने पूंछा की यहां तपस्या में लीन महर्षि च्यवन रहते हैं, किसी ने उनका अपमान तो नही किया, तब सुकन्या ने कहा कि " पिताजी मैं एक बॉंबी के पास गई थी, उसमे मुझे एक जुगुनू सा चमकता जीव दिखाई दिया था जिसे मैंने छेद दिया था, तब राज शर्याति वहां गए और ऋषि को पहचान कर उनसे प्रार्थना की कि " हे मुनि अज्ञानता वश मेरी पुत्री से ऐसा अपराध हुआ है, अतः मेरी पूरी सेना सहित उसे क्षमा प्रदान करें, यह सुनकर मुनि बोले कि " राजन क्षमा तो मैं कर दूंगा लेकिन तुम्हारी पुत्री को मुझसे विवाह करना होगा,

        तब राजा शर्याति ने सुकन्या का विवाह मुनि च्यवन से कर दिया और उसे सौंपकर अपने राज्य लौट आये, सुकन्या भी अपने पति की तन मन से सेवा करने लगी, एक दिन वह अपने आश्रम में खड़ी थी कि तभी वहां से गुजरते अश्विनकुमारों की नजर उस पर पड़ी, तो उन्होंने उससे पूंछा की " तुम किसकी पुत्री हो या किसकी पत्नी हो, और इस वन में क्या कर रही हो, सुकन्या ने जबाब दिया कि " मैं राजा शर्याति की पुत्री और महर्षि च्यवन की पत्नी हूँ, तब सारा हाल जानकर अश्विनकुमारों ने सुकन्या से कहा कि " तुम अपने पति महर्षि च्यवन से जाकर कहो कि हम उन्हें फिर से  युवा कर सकते हैं, क्योकि हम देवताओ के वैद्य है,

       तब सुकन्या महार्षि च्यवन के पास गई और सारा वृतांत सुनाया, और महर्षि च्यवन ने भी स्वीकृति दे दी, तब अश्विनकुमारों ने च्यवन ऋषि को सरोवर में गोता लगाने को कहा और स्यंम अश्विनकुमारों ने भी महार्षि के साथ सरोवर में गोता लगाया, और एक मुहूर्त बाद वें तीनो दिव्यरूप धारी युवा और समान रूपधारी सरोवर से बाहर निकले, और बोले कि " तुम हम तीनों में से किए एक को अपने वर रूप में चुनो, यह देख सुकन्या एक क्षण के लिए सहम गई, लेकिन अपने मन और बुद्धि से वह च्यवन ऋषि को पहचान गईं, और उनका ही चुनाव कर लिया,

          तब महर्षि च्यवन बोले कि " हे अश्विनकुमारों आपने मुझे यौवन प्रदान किया है इसलिए मैं भी आपको सोमपान का अधिकार दिलाऊंगा, यह सुनकर अश्विनकुमारों बहुत प्रसन्न हुए और स्वर्ग चले गए, और जब यह बात राजा शर्याति को पता चली की महर्षि च्यवन युवा हो गए है तो वें उनके आश्रम पहुँचे, और वहां यज्ञ करवाने की ठानी, जब यज्ञ पूरा हुआ तो महार्षि च्यवन ने अश्विनकुमारों को भी यज्ञ में भाग दिया, लेकिन इंद्र ने उन्हें रोकते हुए कहा कि " यह अश्विनकुमारों यज्ञ का भाग देने लायक नही है और न ही इसके अधिकारी हैं,

 यह सुन च्यवन ऋषि बोले कि " देवराज ये दोनों बड़े उदार, उत्साही, रूपवान, और धनवान है, तुम्हारे या अन्य देवताओं के सामने इनका सोमरस में अधिकार कैसे नही हो सकता है, तब इंद्र ने कहा कि " ये चिकित्साकार्य करते है और मृत्युलोक में मनमाना रूप धारण करके घूमा करते है इन्हें सोमरस का अधिकार कैसे हो सकता है, लेकिन देवराज की बातों को अनसुना करके महार्षि च्यवन ने अश्विनकुमारों के लिए उत्तम सोमरस ले लिया, यह सब देख क्रोधित इंद्र बोले कि " यदि तुम हमारे लिए तैयार सोमरस को इस प्रकार अश्विनकुमारों के लिए स्यंम ग्रहण करोगे तो मैं तुमपर बज्र छोड़ दूंगा,

          ऐसा कहने पर भी महार्षि च्यवन ने अश्विनकुमारों के लिए उत्तम सोमरस ले लिया, तब देवराज इंद्र उनपर बज्र छोड़ने ही वाले थे कि महार्षि च्यवन ने उनके हाथों को वहीं स्तंभित (रोक) दिया,  और अपने तपशक्ति से अग्निकुंड से एक भयानक राक्षस उत्पन्न किया, जो इंद्र को निगलने के लिए उनकी और दौड़ा, यह देख इंद्र घबरा गए और महार्षि को पुकारते हुए बोले " क्षमा मुनीश्वर अश्विनकुमारों सोमरस के अधिकारी हुए, तभी से अश्विनकुमारों को यज्ञ में भाग और सभी देवताओं की तरह सोमरस का अधिकार भी प्राप्त हो गया,

        तो दोस्तो आपको कथा अच्छी है तो कमेंट में जरूर बताएं , धन्यवाद

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