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महाभारत के योद्धा किस देवता या राक्षस के अवतार थे,

           महाभारत के योद्धा    


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नमस्कार दोस्तों

        महाभारत युद्ध मे भाग लेने वाले योद्धा किस देवता या दानव के अवतार थे, आज मैं आपको बताऊंगा, इसका वर्णन महाभारत के आदिपर्व मे किया गया है,


कथानुसार :-
       
        ज़ब पृथ्वी अपने भार से पीड़ित होकर श्री हरि विष्णु के पास गई, तब भगवान विष्णु ने पृथ्वी की व्यथा समझते हुए, सभी देवताओं को आदेश दिया की " सभी देवता अंश से पृथ्वी पर अवतार लेंगे और पृथ्वी का भार कम करने मे मेरे सहायक बनेंगे, तब खुद भगवान विष्णु श्री कृष्ण के रूप मे पृथ्वी पर अवतरित हुए, तथा शेषनाग जी हलधर बलराम जी के रूप मे जन्मे, कालनेमि दैत्य कंश के रूप मे, दानवराज विप्रचित्ति जरासंध के रूप मे, तथा हिरण्यकशिपु शिशुपाल के रूप मे, और सह्वाद ने शल्य का रूप और उसके छोटे भाई अनुह्वाद ने धृष्टकेतु का रूप धारण किया, भारद्वाज मुनि के यहाँ वृहस्पति जी द्रोणाचार्य के रूप मे अवतरित हुए, वें श्रेष्ठ धनुर्धर, वेदज्ञाता, और परम तेजस्वी थे,

          द्रोणाचार्य के पुत्र के रूप मे अश्वथामा का जन्म हुआ जोकि महादेव, यमराज, काल और क्रोध का अंशावतार था, वशिष्ठ ऋषि के श्राप और इंद्र की आज्ञा से आठों वशु राजर्षि शान्तनु के द्वारा गंगा के गर्भ से उत्पन्न हुए, जिनमे से सबसे छोटे पितामह भीष्म थे जोकि कौरवों के रक्षक, वेदज्ञाता, श्रेष्ठवक्ता, और धनुर्धर भी थे, रूद्र के एक गण ने कृपाचार्य के रूप मे अवतार लिया, द्वापरयुग के अंश से मामा शकुनि का जन्म हुआ, मरुदगण के अंश से सत्यवादी सात्यिकी, राजर्षि द्रुपद, कृतवर्मा और विराट का जन्म हुआ,

        अरिष्टा का पुत्र हंस नामक गंधर्व धृतराष्ट्र के रूप मे उत्पन्न हुआ, वहीँ सूर्य के अंश धर्मराज से विदुर का जन्म हुआ था, कलयुग के अंश से दुर्योधन का जन्म हुआ जोकि महाभारत का सूत्रधार बना, और पुलत्स्यवंश के राक्षसों ने दुर्योधन के 100 भाइयों के रूप मे जन्म लिया, धृतराष्ट्र का पुत्र युयुत्सु जोकि वेश्या के गर्भ से जन्मा था वह इस सबसे अलग था, वही युधिष्ठिर धर्मराज के अंश से,  भीमसेन वायुदेव के अंश से, इन्द्र के अंश से अर्जुन का, तथा नकुल सहदेव अश्विनकुमारों के अंश से उत्पन्न हुए थे,

      चन्द्रमा के पुत्र वर्चा ने अभिमन्यु के रूप मे जन्म लिया था, वर्चा के जन्म के समय चन्द्रमा ने देवताओं से कहा था कि " मैं अपने प्रिय पुत्र को नहीं भेजना चाहता हूँ लेकिन असुरों का वध करना भी हमारा ही कर्तव्य है, अतः मैं पीछे नहीं हटूँगा, इसलिए वर्चा मनुष्य बनेगा तो सही, लेकिन ज्यादा दिनों तक पृथ्वी पर नहीं रहेगा, इंद्र का अंशावतार अर्जुन होगा और मेरा पुत्र अर्जुन का पुत्र बनेगा, नर नारायण के उपस्थित न रहने पर चक्रव्यूह का भेदन करेगा, और दिनभर घमासान युद्ध करके शाम को मुझसे आकर मिलेगा, अर्थात वीरगति प्राप्त करेगा, और इसकी पत्नी से जो पुत्र उत्पन्न होगा, वही कुरुकुल का वंशधार होगा, सभी देवताओं ने चन्द्रमा कि बात मान ली, जिसके फलस्वरूप कुरुकुल के वंशधर राजा परीक्षित हुए,

         वहीँ अग्नि के अंश धृष्टद्युम्न और राक्षस के अंश से शिखंडी का जन्म हुआ, विश्वदेवगण द्रोपती के पाँचों पुत्र, प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानीक, और श्रुतसेन रूप मे पैदा हुए, तथा सूर्य के अंशावतार दानवीर कर्ण हुए, जो अपनी दानवीरता, धनुर्विद्या, के लिए जाने जाते थे, सनत्कुमार जी प्रदुम्न के रूप मे जन्मे थे, इंद्र कि आज्ञा से अप्सराओं के अंश से 16000 स्त्रियां उत्पन्न हुई, राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी लक्ष्मी जी का अवतार थीं, और द्रुपद की पुत्री द्रोपती इन्द्राणी का रूप थीं, वहीं कुंती सिद्धि का, और माद्री धृति का अवतार थीं, जोकि पांडवों की माता हुई, और मति का जन्म गान्धारी के रूप मे हुआ था इस प्रकार देवता, राक्षस, गंधर्व, और अप्सरा अपने -2 अंशावतार से अवतरित होकर पृथ्वी के भार को दानवों के भार से मुक्त किया,

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                                         साथ की जय श्री कृष्णा अवश्य लिखें कमेंट मे,  धन्यवाद 

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