Breaking News

मरे हुए कौरव पाण्डव हुए थे जीवित.

www.rahulguru.com
www.rahulguru.com
नमस्कार दोस्तों
               महाभारत युद्ध मे मारे गए समस्त कौरव पाण्डव योद्धा हुए थे एक रात्रि के लिए जीवित, इस घटना का सम्पूर्ण वर्णन महाभारत के आश्रमवासिकपर्व मे किया गया है जो कुछ इस प्रकार है,

कथानुसार :-
             महाभारत के युद्ध के समिति के बाद, ज़ब धृतराष्ट्र ने अपने पुत्रों और सभी सगे संबंधियों के साथ अपना और गांधारी का भी श्राद्ध करवा दिया, और कुंती, गांधारी, विदुर, तथा संजय के वन मे चले आये, और तपस्वियों की भांति रहने लगे, तो उसके 16 वर्ष बाद युधिष्ठिर अपने सगे सम्बन्धियों के साथ उनसे मिलने के लिए के लिए उनके आश्रम मे गए, वहाँ पहुंचकर युधिष्ठिर ने अपनी माता कुंती, गांधारी और धृतराष्ट्र के दर्शन किये, और कुशल मंगल पूँछा, और महात्मा विदुर के वहाँ न पाकर ज़ब धृतराष्ट्र से विदुर के बारे मे पूँछा तो धृतराष्ट्र ने बताया की वह कठोर तपस्या कर रहे है,

सिर्फ वायु (हवा) का पान करके ही वह जीवित रहते हैँ, इसलिए बहुत दुर्बल हो गए हैँ, तभी विदुर जी युधिष्ठिर को आश्रम मे आते दिखे, लेकिन मनुष्यों की भीड़ देखकर वे आपस लौट पड़े, यह देख युधिष्ठिर उनके पीछे पीछे दौड़े पुकारते हुए, लेकिन विदुर जी नहीं रुके और वन मे प्रवेश कर गए, वन मे युधिष्ठिर को विदुर जी एक पेड़ के निचे खड़े दिखाई दिए, वहाँ पहुंचकर युधिष्ठिर बोले की ' मै आपका प्रिय युधिष्ठिर हूँ, लेकिन तभी विदुर के प्राण निकलकर युधिष्ठिर मे समा गए, क्योंकि वें दोनों ही धर्मराज यम के अवतार थे, अतः विदुर के शरीर को प्राणहीन देखकर युधिष्ठिर ने विदुर के शरीर का दाहसंस्कार करने की सोची,

लेकिन तभी आकाशवाणी हुयी की " राजन विदुर सन्यासधर्म का पालन करने वाले थे अतएव उनके शरीर का दाहसंस्कर न करो, यही सनातन धर्म है, उन्हें सतानिक लोक की प्राप्ति होंगी, इसलिये आप शोक न करें, यह बात उन्होंने आकर धृतराष्ट्र को बताई, और एक रात्रि बिताने के पश्चात अगले दिन मुनि व्यास जी धृतराष्ट्र के आश्रम मे आये, तब धृतराष्ट्र समेत सभी ने उनका उचित अतिथि सत्कार किया, जिससे प्रसन्न होकर व्यास जी बोले की " आज मै तुम सबको अपने तप का प्रभाव दिखाऊंगा, मांगिये क्या इच्छा है आपकी, तब धृतराष्ट्र बोले कि भगवन महाभारत मे जो मेरे पुत्र पौत्र और सगे सम्बन्धी मारे गए है, उनकी क्या गति हुयी होंगी यह सोचकर मेरा मन बहुत अशांत रहता है, गांधारी भी बोली कि " हे मुनि 16 वर्ष बीत गए लेकिन आजतक शांति नहीं मिली, क्या आप एक बार हमें हमारे मरे हुए पुत्र, पौत्र तथा सगे सम्बन्धियों से मिला सकते है,

तब व्यास जी बोले कि" पुत्री आज रात्रि को ही मै तुम सबको उन सभी के दर्शन कराऊंगा जो युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे, तुम सब लोगों के मन में जो पारलौकिक भय के कारण जो दुःख भरा हुआ है, उसे आज दूर कर दूंगा, अतः सभी गंगा तट पर चलो, वही सभी को उनके मरे हुए प्रियजनों के दर्शन होंगे, तब सभी प्रसन्नता पूर्वक व्यास जी के साथ गंगा तट पर गए, और रात्रि होने कि प्रतीक्षा करने लगे,  उस समय एक एक पल जैसे वर्षों लग रहे थे, ज़ब सूर्य अस्त हुआ और रात्रि होने को आयी, तब सभी सांयकाल के नियमो से निवृत होकर व्यास जी पास आये, तब महातेजस्वी व्यास जी ने भगीरथी (गंगा) के जल मे प्रवेश किया, और समस्त कौरव पाण्डव पक्ष के योद्धाओ का आह्वाहन किया,

उसी समय पानी के अंदर से तुमुलध्वनि सुनाई पड़ी, जैसा कुरुक्षेत्र मे कौरव पाण्डव सेना के इकठ्ठा होने पर सुनाई देती थी, थोड़ी ही देर बाद कर्ण, भीष्म, द्रोणाचार्य, और दुर्योधन सहित समस्त वीर योद्धा गंगा के जल से बाहर आये, जिस वीर का युद्ध के दौरान जैसी ध्वजा जैसा रथ था, वह उससे युक्त था, सबने दिव्य वस्त्र तथा दिव्य कुण्डल धारण किया हुआ था, तब व्यास जी ने धृतराष्ट्र को दिव्य दृष्टि दी, और गांधारी भी दिव्यज्ञान से संपन्न हो गयीं, अतः उन सब ने अपने पुत्रो समेत सभी सगे सम्बन्धियों को देखा, सभी ने अपने प्रियजनों के साथ एक रात बिताई, और घूमने फिरने का आनंद लिया,उस समय कोई किसी का शत्रु न था,
सब अपने प्रियजनों से मिलकर बहुत प्रसन्न हुए, और उन सबका मानसिक दुःख भी दूर हो गया,अंत मे सब एक दूसरे से गले मिले और जैसे आये थे, वैसे ही चले गए, अतः व्यास जी सबका विसर्जन कर दिया, उन सबके अदृश्य हो जाने के पश्चत व्यास जी उन विधवाओं से बोले कि " तुम सब मे से जो भी अपने पति के लोक मे जाना चाहती है वह गंगा जी मे गोता लगाए, यह सुनकर सभी विधवा स्त्रियाँ गंगा जी मे कूद पड़ी, और मनुष्य शरीर का त्याग कर अपने पति के साथ उत्तम लोक चलीं गईं, इस प्रकार सभी अपने सगे सम्बन्धियों से मिलकर धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती समेत समस्त पाण्डव गण तृप्त हो गए, और युधिष्ठिर भी हस्तिनापुर वापस लौट आये,

दोस्तों आपको कथा कैसी लगी हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बतायेँ,           👉 धन्यवाद 👈

REED MORE STORIES :-

पाण्डवों कि मृत्यु कैसे हुयी..?
शिवनगरी को क्यों जलाया श्री कृष्ण ने..?
भगवान् शिव और श्री कृष्ण का युद्ध..?
ज़ब युद्ध से भागे श्री कृष्ण..?

कोई टिप्पणी नहीं