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पीपल का महत्व

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नमस्कार दोस्तों
              भारतीय संस्कृति में पीपल के पेड़ को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, पीपल के पेड़ को अक्षय वृक्ष, देव वृक्ष, गुह्यपुष्पक, आदि नामों से भी जाना जाता है,


एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि" हे मधुसूदन आप मुझे पीपल के पेड़ का महत्व बताएं, पीपल का दर्शन आपके दर्शन के समान क्यों है, और इसके पूजा से क्या लाभ प्राप्त होता है, तब भगवान श्रीकृष्ण बोले कि "राजन मैं ही पीपल वृक्ष के रूप में रहकर तीनों लोगों का पालन करता हूं, जहां पीपल का वृक्ष नहीं वहां मेरा वास नहीं, जहां मैं रहता हूं वहां पीपल भी रहता है, जो भी व्यक्ति भक्ति भाव से पीपल वृक्ष की पूजा करता है, उसके द्वारा मेरी ही पूजा होती है, और जो पीपल पर प्रहार करता है, वह वास्तव में वह मुझको ही अपने प्रहार का लक्ष्य बनाता है, इसलिए पीपल को काटना नहीं चाहिए, पीपल वृक्ष पर शनि की छाया रहती है, इसकी छाया में यज्ञ हवन पूजा पाठ कथा सुनना आदि श्रेष्ठ माना गया है,

पदम पुराण के अनुसार पीपल वृक्ष भगवान विष्णु का रूप माना गया है, तथा देव वृक्ष की पदवी दी गई है, वही मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष मे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है, पीपल पत्तों से शुभ कार्यों में वंदनवार भी बनाया जाता है,

स्कंद पुराण में बताया गया है, कि पीपल वृक्ष की जड़ में भगवान विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि, फलों में सभी देवता सदा निवास करते हैं, पीपल वृक्ष में सभी पितरों का वास भी माना जाता है, तथा सभी तीर्थों के निवास करने की भी मान्यता है, इसलिए पीपल वृक्ष के नीचे मुंडन आदि संस्कार का प्रचलन है,

वही शनि महाराज की साढेसाती, ढैय्या के कुप्रभाव से बचने के लिए, शनिवार के दिन पीपल वृक्ष पर जल चढ़ा कर 7 बार परिक्रमा करें, तथा शाम को पीपल वृक्ष के नीचे दिया जलाएं, वही पीपल वृक्ष की लगातार पूजा परिक्रमा तथा जल चढ़ाते रहने से संतान प्राप्ति का भी लाभ होता है, तथा अदृश्य आत्माएं तृप्त होकर आपकी सहायक बन जाएंगी, और यदि कोई मनोकामना है तो पीपल वृक्ष के तने में कच्चा सूत लपेटने की भी परंपरा है,

माना जाता है कि सूर्योदय होने के पहले पीपल वृक्ष पर दरिद्रता का वास होता है, तथा सूर्योदय के बाद माता लक्ष्मी का, इसलिए सूर्योदय के पहले पीपल की पूजा नहीं करनी चाहिए, इसलिए रात्रि को पीपल के नीचे सोना भी अशुभ बताया गया है,

वहीं यह भी माना जाता है कि पीपल वृक्ष का सीधा संबंध वृहस्पति ग्रह से है, बृहस्पति ग्रह सभी ग्रहों में सर्वाधिक लाभप्रद होता है क्योंकि बृहस्पति धन का कारक माना जाता है, इसलिए पीपल वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाने से कुंडली में मौजूद कमजोर बृहस्पति मजबूत होता है, अतः ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी पीपल वृक्ष की पूजा लाभकारी है, जो धन प्रवाह आसान करता है, तथा व्यक्ति को दीर्घ जीवी और बुद्धिमान बनाता है, और जो व्यक्ति पीपल को निरंतर पानी देता है वह समस्त पापों से छुटकारा पाकर स्वर्ग को प्राप्त करता है,

पीपल के पेड़ को अक्षय वृक्ष भी कहा गया है, जिसके पत्ते कभी समाप्त नहीं होते, पीपल की यही खूबी जन्म मरण के चक्र को भी दर्शाती है, पीपल वृक्ष के नीचे ही महात्मा बुद्ध को सच्चाई का बोध हुआ था और ज्ञान प्राप्त हुआ था, पीपल वृक्ष से जुड़ी एक धारणा यह भी है कि इसके भीतर बुरी शक्तियों का वास होता है मतलब भूत प्रेत का लेकिन यह सरासर झूठ है,

अंतिम संस्कार से भी जुड़ा है पीपल का वृक्ष, माना जाता है कि अंतिम संस्कार के बाद आस्तियों को एक मटकी में एकत्रित करके, लाल कपड़ा बांधकर पीपल पर टांगने से, मरने वाले की आत्मा पीपल के पेड़ में निवास करने लगती है, वही शास्त्रों की माने, तो यदि व्यक्ति पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग की स्थापना करके नित्य पूजा पाठ करता है, तो उसकी सभी परेशानियां हल हो जाती है, और आर्थिक समस्या से भी छुटकारा मिलता है,

पीपल के वृक्ष का ऐतिहासिक महत्व भी है चाणक्य काल में पीपल के पत्ते से सांप का जहर भी उतारा जाता था तथा जल को शुद्ध करने के लिए पीपल के पत्तों को जलाशयों तालाबों तथा कुओं में भी डाला जाता था, वहीं यदि किसी जलकुंड या कुएं के निकट पीपल उग जाता था तो लोग उसे बहुत शुभ मानते थे,

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पीपल का वृक्ष लाभकारी है, क्योंकि यह अकेला ऐसा अनोखा पेड़ है जो 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है, जो मनुष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है प्राचीन काल में पीपल के पत्तों जड़ों से भी कई सारी बीमारियों का इलाज किया जाता था औषधियों का भी ढेर है पीपल,

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