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फांसी के समय जल्लाद कैदी के कान मे क्या कहता है..?

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नमस्कार दोस्तों
                 क्या आप जानते हैं कि फांसी देने से पहले कौन कौन सी प्रक्रिया पूरी की जाती है, जल्लाद अपराधी के कान में क्या कहता है, अपराधी अपनी कौन-कौन सी इच्छा पूरी कर सकता है, या फिर फांसी की सजा सुनाते वक्त जज अपनी पेन की निब क्यों तोड़ देता है, फांसी की सजा के सारे कायदे कानून जानने के लिए यह वीडियो अंतिम तक देखें,

दोस्तों को फांसी का नाम सुनते ही हमारे मन में हलचल मच जाती है, तो सोचिए फांसी की सजा मिली उस अपराधी पर क्या बीतती होगी, जज भी फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ देता है, उसका कारण यह है, कि दोबारा इस कलम से किसी को भी फांसी की सजा ना मिले, और फिर फांसी दुनिया की सबसे कठोर सजा है, इसलिए भी पेन तोड़ दिया जाता है, फांसी देने से पहले जेल अधीक्षक कैदी के परिजनों को 15 दिन पहले ही सूचना दे देता है, फांसी देते वक्त जेल सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, असिस्टेंट सुपरीटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर, मजिस्ट्रेट और जल्लाद वहां उपस्थित होता है, कैदी की इच्छा अनुसार धार्मिक गुरु भी फांसी स्थल पर उपस्थित रह सकता है, वहीं फांसी स्थल का निरीक्षण एक दिन पहले इंजीनियर द्वारा कराया जाता है, फांसी देने का समय दिन तारीख पहले से ही निश्चित रहता है,

 फांसी के दो फंदे रखे जाते हैं, जिसमे मोम या मक्खन लगा होता है, और रस्सी की मोटाई डेढ़ इंच से ज्यादा की होती है, फांसी देने के तय समय से 18 या 24 घंटे पहले जेल सुपरिटेंडेंट काल कोठरी के बाहर खड़ा होकर डेथ वारंट कैदी को पढ़कर सुनाता है, फांसी की प्रक्रिया पूरी करने में 2 घंटे का समय लगता है, इसलिए कैदी को 2 घंटे पहले उठा दिया जाता है और नहला धुला कर तैयार किया जाता है, ताकि कैदी अगर धार्मिक कर्मकांड जैसे पूजा-पाठ करना चाहे तो कर सके एक दिन पहले कैदी से उसकी आखिरी इच्छा पूछी जाती है, जिसमें वह चाहे जो मर्जी खा पी सकता है, परिजनों से मिल सकता है, पूजा पाठ कर सकता है या फिर धार्मिक किताबें या कुछ अन्य चीजें पढ़ सकता है,

 फांसी के सामान में खटका मतलब लीवर दो कपड़े काले और सफेद एक रस्सी हाथ बांधने के लिए और रेत की बोरी जो कैदी के वजन के बराबर होती है, फांसी देते वक्त कोई भी बातचीत नहीं कर सकता हाथ मुंह के इशारों से या फिर कागज कलम से लिख कर ही बात कर सकता है, फांसी देते वक्त कैदी के हाथ रस्सी से बंधे होते हैं, और कैदी के मुंह पर काला सूती कपड़ा डाला जाता है, जब कैदी को फांसी के तख्ते पर चढ़ाया जाता है, तब जल्लाद कैदी के कान में कहता है कि हिंदू भाई को राम-राम, मुस्लिम भाई को सलाम, हम तो सरकार के गुलाम हैं इसमें मेरा कोई दोष नहीं, और जेलर के इशारे पर जल्लाद खटका खींच लेता है,

कैदी को 30 मिनट तक फांसी पर लटकाया जाता है, जब डॉक्टर कैदी को मृत घोषित करता है, तब उसकी लाश फंदे से नीचे उतरी जाती है, वहीं जब मृतक के रिश्तेदार अंतिम संस्कार के लिए लिखित आवेदन देते हैं, तो जेल सुपरीटेंडेंट उन्हें अनुमति देता है, यह सारी प्रक्रिया होने के बाद सुपरिटेंडेंट इसकी रिपोर्ट जेल के इंस्पेक्टर जनरल मतलब IG को देता है,

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