Breaking News

9वी बेताल कथा राजकुमारी अनंगरति

Betal pachchisi
www.rahulguru.com
नमस्कार दोस्तों
                   9वीं बेताल कथा कुछ इस प्रकार हैं पहले की तरह राजा विक्रमादित्य ने फिर बेताल को पेड़ से उतारा और कंधे पर लादकर चल पड़ा, रास्ते में बेताल फिर बोला कि राजन कहां राज्य का सुख और कहां रात्रि में इस महा श्मशान में घूमना तुमने योगी के कहने पर ना जाने क्यों यह कार्य स्वीकार कर लिया यह सोच कर मुझे बड़ी दया आ रही है अतः एक कथा और सुनो,

देवताओं द्वारा रचित अवंती राज्य में एक विराट राज्य है जो सभी प्रकार के ऐश्वर्या से संपन्न है, वह नगरी सतयुग में पद्मावती त्रेता युग में भोगवती द्वापर युग में हिरण्यवती तथा कलयुग में उज्जैनी नाम से प्रसिद्ध है, वहां वीर देव नामक राजा राज्य करता था जिसकी पत्नी का नाम पदम रति था, पुत्र की कामना से राजा ने अपनी पत्नी सहित मंदाकिनी के तट पर भगवान शिव की तपस्या प्रारंभ की, बहुत दिनों की घोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुये तथा आकाश से उनकी वाणी सुनाई पड़ी "राजन तुम्हारे कुल में अत्यंत पराक्रमी पुत्र उत्पन्न होगा साथ ही एक कन्या भी उत्पन्न होगी जो अप्सरा के समान सुंदर होगी ´´ आकाशवाणी सुनकर राजा अपने नगर वापस लौट आए,

उसी के थोड़े ही दिनों बाद उसे सूरसेन से नामक पुत्र तथा अनंगरति नामक एक कन्या उत्पन्न हुई, ज़ब वह कन्या बड़ी हुईं तो उसके योग्य पति प्राप्त करने के लिए राजा ने भूमंडल के सभी राजाओं के छायाचित्र मंगवाए, लेकिन जब राजा को उनमें से कोई भी उनकी कन्या के लिए उचित वर मिला तो वह अपनी पुत्री से बोला कि "पुत्री मुझे तो तुम्हारे योग्य कोई वर नहीं मिला, अतः तुम खुदअपना वर स्वयंबर द्वारा चुनो ´´ यह सुनकर कन्या बोली कि " पिताजी मैं विवाह नहीं करना चाहती, लेकिन अगर कोई अनोखी कला का ज्ञाता हो तो मैं उससे विवाह कर लूंगी ´´ पुत्री की बात सुनकर राजा उसके लिए वैसा ही वर ढूंढने लगा, जब चारों तरफ बात फैली तो दक्षिणपथ से चार पुरुष वहां आ पहुंचे जो वीर भी थे और कलाओं में निपुण भी,


राजा ने उनका स्वागत किया और अपनी अपनी कला दिखाने के लिए कहा तब उनमें से एक बोला कि " हे राजन में शूद्र हूँ मेरा नाम पञ्चपाटिक है, मैं प्रतिदिन पांच जोड़े उत्तम वस्त्र तैयार करता हूं उनमें से एक जोड़ा वस्त्र देवता को चढ़ाता, हूं एक ब्राह्मण को देता हूं एक जोड़ा मै पहनने के लिए रखता हूं, अगर इस कन्या का विवाह मुझसे हो गया तो एक जोड़ा मैं इसे दूंगा और एक जोड़ा वस्त्र बेच कर अपना जीवन निर्वाह करूंगा, इस अनंगराति का विवाह आप मुझसे करें, तब दूसरा बोला कि" राजन मैं वैश्य हूं मेरा नाम भाषाज्ञ है मैं सभी पशु पक्षियों की बोली जानता हूं और समझता हूं, अतः आप को अनंगरति का विवाह मुझसे करना चाहिए, लेकिन तभी तीसरा बोला कि " हे राजन मेरा नाम खड़गधर है, मैं एक क्षत्रिय हूं, खड़ग विद्या में मेरी बराबरी कोई करने वाला इस धरती पर उत्पन्न नहीं हुआ है, अतः राजन आप अपनी कन्या का विवाह मुझसे ही करें, लेकिन तभी चौथा बोला कि " हे राजा मैं ब्राह्मण जीवदत्त हूँ, मेरे पास एक ऐसी विद्या है जिससे मैं मरे हुए प्राणियों में प्राण डाल देता हूं, अतः आप को मेरा ही चुनाव करना चाहिए, अपनी कन्या के पति के रूप में उन सब की बात सुनकर राजा सोच में पड़ गया कि वह अपनी कन्या किसे दे, सभी एक से बढ़कर एक है,

इतनी कथा सुनाकर बेताल बोला कि" राजा अब तुम ही बताओ कि राजकुमारी अनंगरति का विवाह किसके साथ करना चाहिए, यह जानकर भी उत्तर नहीं दिया तो निश्चित ही तुम्हारा सिर मेरे श्राप से सौ टुकड़े हो जाएगा, तब राजा विक्रमादित्य बोले कि " हे बेताल आप समय व्यतीत करने के लिए मेरा मेरा मौन भंग करते हैँ अन्यथा आपका यह प्रश्न कौनसा कठिन है,

आप स्वयं सोचिए शूद्रको कन्या कैसे दी जा सकती है,
वैश्य को भी छत्रिय कन्या नहीं दी जा सकती,
तीसरा जो ब्राम्हण अपना सारा कार्य छोड़कर आशिक बना है वह भी उसके पति होने के योग्य नहीं है,
अथवा क्षत्रिय ही उस राजकन्या के विवाह योग्य है, क्योंकि वह कुल में भी समान है तथा अपनी विद्या जानने वाला क्षत्रिय है, राजा की बात सुनकर बेताल बोला कि राजन आप बिल्कुल सही कह रहे हैं क्योंकि सामान कुल और पराक्रमी व्यक्ति के साथ ही विवाह उचित होता है लेकिन मेरे प्रश्न का उत्तर देने के चक्कर में तुम हम दोनों की शर्त भूल गए इसलिए अब मैं चलता हूं वह बेताल फिर उसी पेड़ में जा लटका लेकिन राजा ने फिर अपनी कमर कसी और बेताल को लाने के लिए पेड़ के पास जा पहुंचा, 

कोई टिप्पणी नहीं