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राजा श्वेत खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, पौराणिक कथा,

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नमस्कार दोस्तों
        राजा श्वेत जो कि अपने ही शरीर का मांस खाया करते थे, लेकिन उनका मांस कभी घटता नहीं था, लेकिन ऐसा क्या कारण था ऐसा कौन सा कर्म किया था उन्होंने कि उन्हें अपने ही शरीर का मांस खाना पड़ रहा था, आइए जानते हैं एक कथा के माध्यम से जिसका उल्लेख भविष्य पुराण के अध्याय नंबर 168 में किया गया है,

कथानुसार :-
                प्राचीन काल में श्वेत नामक चक्रवर्ती राजा हुए जिन्होंने बहुत सारे युद्धों में विजय प्राप्त की कई यज्ञ अनुष्ठान किये, अनेक प्रकार के दान पुण्य किये उनके राज्य में सभी प्रजा सुखी और संपन्न थी, और अंत में राज्य का त्याग करके वन में जाकर तपस्या करते हुए स्वर्ग सिधार गए, स्वर्ग में किन्नर विद्याधर आदि के साथ घूमते थे अप्सराएं उनकी सेवा किया करती थी इंद्र भी राजा श्वेत का बड़ा सम्मान करते थे राजा को दिव्य वस्त्र आभूषण आदि सभी सुख प्राप्त थे,

लेकिन भोजन के समय उन्हें भूलोक में आकर अपने पूर्व शरीर के मांस को प्रतिदिन खाना पड़ता था, प्रतिदिन मांस का भोजन करने के बाद भी पूर्व जन्म के कर्म के कारण उस पूर्व शरीर का मांस घटता नहीं था, इस प्रकार रोज-रोज अपने ही शरीर का मांस खाकर राजा श्वेत बहुत व्याकुल हो गए, वह ब्रह्मा जी के पास गए और प्रणाम करके बोले कि " हे परमपिता आपकी अनुकंपा से स्वर्ग का सुख तो भोग रहा हूं, सभी देवता भी मेरा बड़ा सम्मान करते हैं, लेकिन यह पापिनी भूख कभी शांत ही नहीं होती, जिस कारण मुझे अपने पूर्व शरीर का मांस खाने प्रतिदिन पृथ्वी लोक पर जाना पड़ता है, मैंने ऐसा कौन सा घृणित पाप कर्म किया था जिसके कारण मुझे उत्तम भोजन नहीं मिलता, कृप्या इस कष्ट से मुझे मुक्ति दिलाएं,

राजा श्वेत की व्यथा सुनकर ब्रम्हाजी बोले "राजन आपने अनेक प्रकार के दान पुण्य किये यज्ञ अनुष्ठान किये गुरुजनो और प्रजाजनों को भी संतुष्ट किया, लेकिन पृथ्वी पर रहते हुए कभी आपने श्रेष्ठजनों को भोजन नहीं कराया, अन्नदान न करने से ही आज आपको यह कष्ट भोगना पड़ रहा हैं, अन्न से बढ़कर कोई संजीवनी नहीं, इसलिए हे राजन ज़ब तक तक आप पृथ्वी पर जाकर श्रेष्ठजनों को भोजन नहीं कराएंगे तब तक आपको यह कष्ट भोगना ही पड़ेगा,

यह सुनकर राजा श्वेत ने ब्रम्हाजी से आज्ञा ली और तुरंत पृथ्वीलोक पहुंचे, जहां उन्होंने श्रेष्ठजनों को ढूंढकर भोजन कराने की व्यवस्था की, ज़ब राजा श्वेत ने पृथ्वी पर श्रेष्ठजनों को अन्नदान और भोजन इत्यादि करा दिया, तो राजा श्वेत अपने उस दोष से मुक्त हो गए, और स्वर्गलोक में अन्य लोंगो की तरह उन्हें भी उत्तम भोजन प्राप्त होने लगा,

तो दोस्तों आपको यह कथा कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें                                              🙏 धन्यवाद 🙏

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