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ज़ब मेंढकी बनी रावण की पत्नी..

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नमस्कार दोस्तों
            रावण की पत्नी मंदोदरी के बारे में कौन नहीं जानता? लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदोदरी पूर्व जन्म में मेंढकी थी आइए जानते हैं इस कथा के बारे में थोड़ा विस्तार से....?

कथानुसार :-
          मधुरा नामक एक अप्सरा स्वर्ग लोक में रहती थी। एक दिन वह ब्रह्मांड में विचरण कर रही थी कि उसकी नजर भगवान शिव पर पड़ी जो भस्म लगाए ध्यानमग्न अपने आसन पर विराजमान थे। शिवजी को देखकर मधुरा उनके पास गई और माता पार्वती को आसपास ना देखकर वह भगवान शिव को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के नृत्य और अंग प्रदर्शन करने लगी। लेकिन तभी वहां माता पार्वती का आगमन होता है।

        जब माता पार्वती देखती हैं कि अप्सरा मधुरा भगवान शिव को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के अंग प्रदर्शन कर रही है तो क्रोधित होकर उसे श्राप देती हुई कहती हैं कि तू अप्सरा होकर जिस निर्लज्जता से अपने अंग प्रदर्शन कर रही है। तू आज से मेंढकी बन जाएगी, तब श्राप से भयभीत मधुरा माता पार्वती और भगवान शिव से क्षमा याचना करती है तो भगवान शिव के समझाने पर माता पार्वती मधुरा से कहती हैं कि ठीक है मैं तुझे क्षमा प्रदान करती हूं। लेकिन तुझे 12 वर्षों तक मेंढकी बन कर कुएं में रहना पड़ेगा उसके पश्चात मेरा श्राप अपने आप खत्म हो जाएगा और तुम अपने स्वरूप को वापस प्राप्त कर लोगी।

     इसके बाद मधुरा मेंढकी रूप में कुएं मे रहकर कठोर तपस्या प्रारंभ कर देती है। इसी दौरान राक्षस राज मयासुर और उनकी पत्नी हेमा भी पुत्री की प्राप्ति के लिए तपस्या कर रहे होते हैं इसी बीच मधुरा की कठोर तपस्या जो कि 12 वर्षों तक चली समाप्त हो जाती है और वह अपने असली स्वरूप को प्राप्त कर लेती है तो वह कुएं से बाहर निकलने के लिए मदद के लिए आवाज लगाती है। जिसे सुनकर राक्षस राज मयासुर और हेमा उसे कुएं से बाहर निकालते हैं और उसे गोद लेकर उसका नाम मंदोदरी रखते हैं। उसके कुछ वर्ष पश्चात रावण मयासुर से मिलने उसके राजमहल आता है। जहां उसकी नजर मंदोदरी पर पड़ती है।

तो वह उस पर मोहित हो जाता है। और मयासुर से मंदोदरी से विवाह की बात करता है लेकिन मयासुर मना कर देता है। तब रावण ने मंदोदरी से जबरन विवाह किया, मंदोदरी न चाहते हुए भी रावण से विवाह करती हैं क्योंकि वह जानती थी कि अगर उसने रावण से विवाह न किया तो मेरे पिता कि मृत्यु निश्चित हैं, मंदोदरी पुरे जीवन रावण को सत्य का बोध कराती रही, शतरंज खेल का जन्मदाता मंदोदरी को ही माना जाता है और शास्त्रों में मंदोदरी को चिर कुमारी कन्या भी माना गया है। वह पंच कन्याओं में से एक थी जो क्रमशः अहिल्या, तारा, कुंती, द्रौपदी और मंदोदरी थी। इन पांचों को महासती भी माना गया है।

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