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इस श्राप के कारण भीष्म को स्त्री सुख प्राप्त नहीं हुआ,

श्राप के कारण स्त्री सुख नहीं मिला था भीष्म को,
नमस्कार दोस्तों
            पितामह भीष्म को ऋषि वशिष्ठ ने दिया था श्राप जिसका वर्णन, महाभारत के आदि पर्व में किया गया है। दरअसल, यह श्राप पितामह भीष्म को अपने पूर्व जन्म में मिला था। वह भी उनकी पत्नी के कारण। जिसका परिणाम उन्हें अपने अगले जन्म में भीष्म के रूप में चुकाना पड़ा।

कथानुसार :-
             पूर्व जन्म में पितामह भीष्म एक वसु थे जो कि स्वर्गलोक में अपनी पत्नी के साथ रहा करते थे। उनका नाम द्यौ था। एक बार वें और उनकी पत्नी भ्रमण कर रहे थे। तो उनकी पत्नी की नजर महर्षि वशिष्ठ के आश्रम पर पड़ी जहां नंदिनी गाय घास खा रही थी। नंदिनी गाय को देख कर द्यौ की पत्नी उस गाय को पाने की जिद करने लगी। अब द्यौ जानते थे कि महर्षि वशिष्ठ नंदिनी गाय को कतई नहीं देंगे।

अतः उन्होंने अपने भाइयों के साथ नंदिनी गाय को चुराने का मन बनाया और योजनानुसार में नंदिनी गाय को वशिष्ठ जी के आश्रम से चुरा ले आए। लेकिन उन्हें महर्षि वशिष्ठ की शक्तियों का ज्ञान नहीं था। अतः जब महर्षि वशिष्ठ ने नंदिनी गाय को अपने आश्रम में नहीं देखा तो मैं उसे चारों तरफ ढूंढने लगे, लेकिन बहुत ढूंढने के बाद भी जब वह नहीं मिली तो उन्होंने ध्यान लगाकर अपनी दिव्य दृष्टि का प्रयोग किया जिसे उन्होंने नंदिनी गाय के चोरी होने का पता लगा।

अतः क्रोधित मुनि ने वसुओं को श्राप दिया कि स्वर्गलोक के वासी होकर भी जिस प्रकार तुमने यह नीच कर्म किया है, इससे तुम्हारा स्वर्ग से पतन हो जाएगा और मृत्यु लोक में जन्म लेकर इस अपराध की सजा भुगतनी पड़ेगी और द्यौ को श्राप दिया कि " तुमने एक स्त्री के कहने पर यह पाप कर्म किया है। अतः मृत्युलोक में तुम्हें स्त्री सुख प्राप्त नहीं होगा। इसका पता जब वसुओं को चला तो वें मुनि वशिष्ठ से क्षमा मांगने लगे, तब महर्षि वशिष्ठ ने द्यौ को छोड़कर सभी वसुओं को क्षमा प्रदान कर दिया।

इसी श्राप के कारण भीष्म को लंबे समय तक पृथ्वी पर रहना पड़ा जबकि उनके अन्य वसु भाइयों को देवी गंगा ने जन्म के तुरंत बाद ही मोक्ष दे दिया।

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