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बेटियों को बुधवार के दिन ससुराल क्यों नहीं भेजना चाहिए, बुधवार व्रतकथा

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नमस्कार दोस्तों
                  बेटियों को बुधवार के दिन ससुराल क्यों नहीं भेजना चाहिए। क्या कारण है या फिर ऐसी कौन सी मान्यता है? आज मैं राहुल आप सब को इसके बारे में बताऊंगा विस्तार?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार सप्ताह के सातों दिन कुछ कार्य न करने की मनाही होती है। उसी प्रकार बुधवार के दिन बेटी को ससुराल भेज ना अशुभ माना जाता है। लेकिन फिर भी कोई लड़की इस दिन ससुराल चली जाती है तो उसका गृहस्थ जीवन काफी दुखदाई हो सकता है। गृह क्लेश बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि ग्रहों के अनुसार बुध चंद्र को अपना शत्रु मानता है लेकिन चंद्र बुध को शत्रु नहीं मानता। कारण यह है कि बुध की पत्नी का हरण चंद्र देव ने किया था और उसे एक पुत्र भी उत्पन्न किया था।

यही कारण है कि बुध चंद्र को अपना दुश्मन मानता है और मान्यता अनुसार बुध को आय और व्यापार का कारक माना जाता है और चंद्र को यात्रा का कारक माना जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि बुधवार के दिन यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है और यदि बेटी की बुध दशा खराब हो तो बेटी को ससुराल कतई ना भेजें क्योंकि यात्रा के दौरान दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। शास्त्रों के अनुसार बुधवार व्रत कथा में भी इसका उल्लेख मिलता है।

बुधवार व्रत कथा :-
             प्राचीन समय में मधुसूदन नामक वैश्य का विवाह संगीता नाम गुणवती कन्या से हुआ था। एक बार बुधवार के दिन मधुसूदन अपने ससुराल पहुंचा और संगीता को साथ चलने के लिए कहने लगा संगीता के माता-पिता ने मधुसूदन को बहुत समझाया कि बेटा आज बुधवार है। आज के दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। लेकिन मधुसूदन नहीं माना और संगीता को साथ लेकर अपने घर की तरफ निकल पड़ा, थोड़ी ही दूर दोनों गए थे कि उनकी बैलगाड़ी का एक पहिया टूट गया हुआ है। तो दोनों वहां से पैदल ही आगे बढ़ने लगे।

तभी संगीता को प्यास लगी तब संगीता को एक पेड़ के नीचे बैठा कर मधुसूदन पानी की तलाश में चला गया। लेकिन जब वह जल लेकर वापस आया तो देखा कि उसकी पत्नी के पास उसका ही एक हमशक्ल बैठा हुआ है। संगीता भी दोनों को एक जैसा देखकर आश्चर्य में पड़ गई और अपने असली पति को नहीं पहचान पाई। अतः दोनों मधुसूदन संगीता को अपनी पत्नी बताकर एक दूसरे से लड़ने लगे। दोनों को लड़ता देखकर वहां पर भीड़ इकट्ठा हो गई। जिसे देख राजा के सिपाही भी वहां पहुंच गए और सारा माजरा जानकर हुआ सिपाही दोनों मधुसूदन और संगीता को राजा के पास ले गए,

लेकिन एक ही शक्ल सूरत होने के कारण राजा भी उनका निर्णय ना कर पाए क्योंकि जो भी सवाल उनसे पूछा जाता तो दोनों ही मधुसूदन का उत्तर एक जैसा ही होता। राजा भी परेशान तभी आकाशवाणी हुई कि है मधुसूदन तूने अपने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन संगीता को अपने ससुराल से विदा कराकर ले जा रहा है। अतः बुद्धदेव के प्रकोप के कारण ऐसा हुआ अब तुम्हारी सहायता केवल बुद्धदेव ही कर सकते हैं।

आकाशवाणी सुनकर मधुसूदन ने बुद्धदेव से क्षमा मांगी और भविष्य में ऐसा कृत्य ना करने का वचन भी दिया। तब बुद्धदेव ने उसे क्षमा प्रदान की और नकली मधुसूदन अपने आप ही गायब हो गया। वह दूसरा व्यक्ति कोई और नहीं स्वयं बुद्धदेव थे। यही कारण है कि बेटी को कभी भी बुधवार के दिन बिदा नहीं करना चाहिए और ना ही बुधवार के दिन किसी भी लड़के को अपने ससुराल जाना चाहिए।

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